विटामिन डी (Vitamin D): कमी के लक्षण और उपाय, 90% कमी सूरज दूर कर सकता है।

विटामिन डी (Vitamin D): आजकल के बच्चों का बचपन बाहर की गतिविधियों में कम बीतता है क्योंकि वर्तमान समय में विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की बढ़ती लत, बढ़ते फ्लैट कल्चर, लगातार मैदाने की होती कमी, एयर कंडीशन के बढ़ते प्रचलन के कारण बच्चे घर के भीतर ही सीमित हो गए हैं। इन परिवर्तनों के परिणाम स्वरूप बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर विपरीत असर पड़ा है।

विटामिन डी (Vitamin D)

आधुनिक युग के यह बदलाव बच्चों के शरीर में एक जरूरी पोषक तत्व विटामिन-डी की कमी को बढ़ावा दे रहे हैं। नेचर पत्रिका में छपे एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 15 करोड़ 19 लाख बच्चों में विटामिन-डी की कमी पाई गई है और अगर आयु वर्ग की बात करें तो विटामिन-डी की यह कमी 2 से 14 वर्ष के बच्चों में अधिक देखने को मिली है।

बच्चों में विटामिन-डी की कमी का पता लगा पाना बेहद मुश्किल है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं।

विटामिन डी (Vitamin D) की हमारे शरीर में भूमिका

विटामिन-डी हमारे शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित रखता है जो हमारे तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली और हड्डियों की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। विटामिन- डी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है साथ ही यह ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखता है।

विटामिन डी (Vitamin D) के प्रकार

विटामिन डी के मुख्यत: पांच प्रकार होते हैं यथा डी-1, डी-2, डी-3, डी-4 एवं डी+5, मानव शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिन डी-2 और डी-3 होते हैं जिन्हें संयुक्त रूप से कैल्सीफेराॅल कहा जाता है।

  • विटामिन डी-2 (एर्गोकैल्सीफेराॅल): यह खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।
  • विटामिन डी-3 (कोलेकैल्सीफेराॅल): यह हमारे शरीर में सूरज की किरणों से द्वारा बनता है।

अमेरिका में हुए एक अध्ययन के अनुसार हमारी त्वचा हमारी आवश्यकता का 90% विटामिन-डी सूरज की किरणों से निर्मित कर सकती है।

बच्चों में विटामिन-डी (Vitamin D) की भूमिका

विटामिन-डी बच्चों के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह बच्चों के दांतों और हड्डियों के विकास के साथ-साथ सभी अंगों के सामान्य कार्य प्रणाली के लिए बेहद आवश्यक है। विटामिन-डी की कमी के कारण बच्चों और नवजात शिशुओं में रिकेट्स की समस्या हो सकती है जबकि बढ़ते बच्चों में विटामिन-डी की कमी पैराथायराॅइड, टेस्टोस्टेराॅन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन के संतुलन का खतरा बढ़ा देते हैं।

लंबे समय तक विटामिन-डी की कमी कंकाल तंत्र को विकृत कर सकती है। विटामिन-डी की कमी से छोटी उम्र में ही ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है इसमें हड्डियां कमजोर और आसानी से टूटने वाली हो जाती हैं।

विटामिन-डी (Vitamin D) कमी के क्या लक्षण है?

बच्चों में विटामिन-डी की कमी के सबसे प्रमुख लक्षणों में से एक है रिकेट्स, जिसे आमतौर पर मुड़ी हुई टांगों या विकृत टांगों के रूप में भी जाना जाता है। रिकेट्स से प्रभावित बच्चों के लिए चलना, भगाना अत्यधिक मुश्किल हो जाता है। ऐसे बच्चों को अपने शरीर में अत्यंत कमजोरी महसूस हो सकती है।

बच्चों की मांसपेशियों की कमजोरी या उनमें ऐंठन का होना भी विटामिन-डी की कमी के लक्षण की ओर इशारा करता है।

बच्चों का विकास समान आयु वर्ग के बच्चों से धीमा होना, प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना, हड्डियों में दर्द का बने रहना भी विटामिन-डी की कमी का लक्षण है।

आंस्टियोमलेशिया यानी हड्डियों का मुलायम हो जाना भी विटामिन-डी की कमी के कारण ही होता है।

बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होना, अवसाद ग्रसित होना या फिर मूड स्विंग होना; यह सभी लक्षण भी विटामिन- डी की कमी के कारण परिलक्षित हो सकते हैं।

किन कारणों से विटामिन-डी (Vitamin D) की कमी का खतरा बढ़ता है?

बच्चों में विटामिन-डी के कमी होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:

  • बच्चों का समय से पूर्व जन्म का होना।
  • सूरज की रोशनी में कम समय बिताना या आउटडोर खेलों में कम संलग्न होना भी बच्चों में विटामिन-डी के कमी का एक कारण हो सकता है।
  • संतुलित भोजन की कमी तथा फॉर्मूला मिल्क का सेवन भी बच्चों में विटामिन-डी की कमी प्रमुख कारण है।
  • Obesity से ग्रसित बच्चों में भी विटामिन-डी की कमी देखने को मिलती है क्योंकि वसा कोशिकाएं शरीर को विटामिन-डी का इस्तेमाल करने से रोकती हैं।

विटामिन-डी‌ (Vitamin D) की कमी न होने देने के उपाय

  • बच्चों को रोज कम से कम 30 मिनट धूप सेकने दें या फिर उन्हें एक से दो घंटे तक घर से बाहर खेलने दें।
  • बच्चों को विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गजेट्स से दूर रखें।
  • बच्चों के खाने में विटामिन-डी से भरपूर खाद्य पदार्थ का उपयोग करें जैसे मछली, लिवर ऑयल, अंडे, दूध, मक्खन, पनीर, मशरूम, पालक, भिंडी आदि।
  • बच्चों को ऑयली और स्पाइसी भोज्य पदार्थों से दूर रखें।

उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए आप यथा संभव अपने बच्चों की दिनचर्या यानी डेली रूटीन में परिवर्तन ला कर उनके विटीमिन-डी की कमी को दूर या पूरा कर सकते हैं।

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