3-in-1 Account With Banks,Pros & Cons

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम 3-in-1 Account With Banks; Pros & Cons (विशेषताएं और कमियां) के विषय में चर्चा करने वाले हैं।

अगर आप भी बैंक ब्रोकर्स के साथ 3-in-1 Account ओपन कराने के बारे में सोच रहे हैं,तो यह पोस्ट आपके लिए मददगार साबित हो सकती है । यह पोस्ट मैंने अपने वक्तिगत अनुभवों के आधार पर लिखी है और मुझे पूरी उम्मीद है की आप इसे अपने लिए लाभकर पाएंगे।

नमस्कार दोस्तों, मैं वरुण सिंह आप सभी का एक बार फिर से आपके अपने ब्लॉग moneynestblog.com के एक नए पोस्ट में स्वागत करता हूं । चलिए आते हैं अपने टॉपिक पर यानी 3-in-1 Account With Banks,Pros & Cons !

दोस्तों, कई बार डिमैट और ट्रेडिंग अकाउंट ओपेन कराते समय आप लोगों के मन मे यह विचार आता होगा कि डिमैट अकाउंट किस बैंक ब्रोकर के साथ ओपेन करे, जैसा कि आप लोगों को पता ही होगा कि भारत के अधिकांश बैंक 3 -in-1 Account अर्थात Demat Account,Trading Account और Saving Account की सुविधा प्रदान करते है ।

दोस्तों, 3-in-1 Account ओपेन कराने के अपने फायदे और नुकसान है–

तो चलिये सर्वप्रथम कुछ फायदों के बारे में बात करते हैं-

  • बैंक पर ग्राहक का भरोसा ज्यादा होता है, इसलिए बैंक के साथ Demat अकाउंट ओपेन करने में ग्राहक को किसी प्रकर का भय नहीं होता है l
  • ग्राहक अपना पोर्टफोलियो एक ही स्थान पर आसानी से देख पाता है l
  • ग्राहक को बार-बार बैंक के Saving अकाउंट से Demat अकाउंट में पैसे ट्रान्सफर नहीं करने पड़ते है l
  • ग्राहक के Saving अकाउंट से उतने ही पैसे कटते है जितने का वह Share खरीदता है बाकी पैसों पर ग्राहक को Saving बैंक अकाउंट का ब्याज़ मिलता रहता है l
  • ग्राहक जब भी अपने Shares बेंचता है तो पैसे उसके Demat के पूल account में न जाकर सीधे Saving बैंक अकाउंट में आ जाते है जिससे बार-बार Demat के पूल अकाउंट से लिंक Saving बैंक अकाउंट में पैसे ट्रान्सफर करने का झंझट नहीं रहता है l
  • समय-समय पर बैंक ब्रोकर्स द्वारा अपनी रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है जों शुरुवात करने वाले ग्राहकों के लिए उपयोगी हो सकती है l
  • बैंक ब्रोकर्स द्वारा ग्रहकों को IPO मे निवेश करने की सुविधा मिलती है और ग्राहक बड़ी ही आसानी से कुछ ही क्लिक्स में IPO के लिए अप्लाई कर पाते हैं l
  • बैंक ब्रोकर्स अपने Demat ग्राहकों को Personal मैनेजर की सुविधा भी प्रदान करते है l
  • किसी भी प्रकार की समस्या होने पर ग्राहक सीधे बैंक के ऑफिस पहुँच कर अपनी समस्या का निवारण करा सकते हैं क्यूंकी बैंक ब्रोकर्स की शाखाएं अक्सर आपको शहरों में मिल जाएंगी l
  • किसी प्रकार की अकस्मात दुर्घटना होने पर ग्राहक द्वारा Demat खाते में नामित व्यक्ति बैंक के कार्यालय पहुँच कर जरूरी कागजी कार्यवाही कर सकता है l
  • बैंक ब्रोकर्स ग्राहकों को कुछ Stocks मेँ SEP यानि Systematic Equity Plan की सुविधा प्रदान करते हैं l
  • कुछ बैंक ब्रोकर्स अपने ग्राहकों को GTC ( Good-Til-Cancelled) ,VTC (Valid Till Cancelled) और GTD (Good Till Date) जैसी सुविधा भी प्रदान करते हैं l

उपर्युक्त फ़ायदों के अलावा 3 in 1 अकाउंट के कुछ नुकसान भी है,चलिये अब एक नज़र उन पर भी डालते है-

  • बैंक ब्रोकर्स के 3 in 1 अकाउंट के Demat का AMC (Annual Maintenance Charges ) शुल्क काफी ज्यादा होता है,जोकि 550/- रुपए से 1000/- रुपए के बीच कुछ भी हो सकता है ,यह शुल्क आपके बैंक ब्रोकर पर निर्भर करता है l
  • बैंक ब्रोकर्स के Demat Account ओपनिंग Charges भी अक्सर ज्यादा ही होते हैं l
  • बैंक ब्रोकर्स के 3 in 1 अकाउंट का Brokerage शुल्क भी काफी ज्यादा होते है,जों ग्राहक के प्रॉफ़िट को कम कर देते हैं l
  • कभी-कभी ऐसा होता है कि ग्राहक 3 in 1 अकाउंट अपने बैंक के कहने पर, दबाव में ओपेन तो करवा लेता है लेकिन उसका प्रयोग नहीं करता है, इस स्थिति में बैंक,ग्राहक के Saving बैंक अकाउंट से AMC शुल्क काट लेता है क्यूंकि ग्राहक का DEMAT अकाउंट उसके Saving अकाउंट से लिंक रहता है यहाँ पर आप AMC देने से बच नहीं सकते हैं l
  • बैंक ब्रोकर्स 3 in 1 अकाउंट में DP Charges भी लेते है ,जो कि अलग-अलग बैंक ब्रोकर्स द्वारा अलग -अलग मात्रा में वसूल किया जाता है l
  • बहुत ज्यादा संभावना है कि आपको किसी भी बैंक ब्रोकर का Trading मोबाइल App अच्छा यानि user friendly देखने को न मिले l आज के समय को देखते हुए यह काफी दिक्कत की बात है l
  • बैंक ब्रोकर्स के साथ 3 in 1 अकाउंट ओपेन करा कर ग्राहक Direct Mutual Funds नहीं खरीद पाएगा मतलब साफ है आपको ज्यादा expense ratio वाले म्यूचुअल फंड्ज खरीदने पड़ेंगे l
  • कुछ बैंक ब्रोकर्स अपने ट्रेडिंग एप्लिकेशन का मासिक शुल्क भी लेते है,जो कि अच्छा खासा होता है यह रीटेल निवेशकों के अनुकूल नहीं है l

दोस्तों, आज के इस तकनीकी युग मे बैंक ब्रोकर्स को अपने 3 in 1 अकाउंट की सुविधा में काफी सुधार करने की जरूरत है और यह जरूरत डिस्काउंट ब्रोकर्स के बाज़ार में आने के कारण काफी बढ़ जाती है l डिस्काउंट ब्रोकर्स द्वारा बैंक ब्रोकर्स को तकनीक और शुल्क दोनों ही क्षेत्रों में कड़ी चुनौती प्रस्तुत की जा रही है l अगर समय रहते बैंक ब्रोकर्स ने अपने में सुधार नहीं किया तो वो समय दूर नहीं जब वो सिर्फ बैंक ही रह जाएंगे l उदाहरण के तौर पर कुछ समय पहले ICICI DIRECT अपने देश का नंबर एक ब्रोकर हुआ करता था जो की अब निचले पायदानों पर सरक चुका है, जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो हो सकता है कि बैंक ब्रोकर्स टॉप 10 की लिस्ट से ही बाहर हो जाएँ l

अब आपको अपनी आवश्यकताओं के हिसाब से अपने लिए एक उपयुक्त ब्रोकर का चयन करना है,याद रखें कोई भी ब्रोकर पर्फेक्ट नहीं है l

दोस्तों मुझे पूरी उम्मीद है की यह पोस्ट आपको अच्छी लगी होगी ,अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई है और आपने इसे अपने लिए लाभप्रद पाया है तो कृपया इस पोस्ट को अपने मित्रों के साथ अधिक से अधिक सोशल प्लेटफार्मों पर साझा करें जिससे अन्य लोग भी लाभांवित हो सकें l

इस पोस्ट में इतना ही, पोस्ट को पूरा पढ़ने और अपना कीमती समय देने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद ! मिलते हैं नेक्स्ट पोस्ट में तब तक के लिए नमस्कार ।

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